उत्तर प्रदेश के मेरठ के लिसाड़ी गेट इलाके में एक चौंकाने वाली घटना में, कार्तिक नाम के एक पड़ोसी ने कथित तौर पर एक महिला को नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ मारपीट की और कई महीनों तक उसे ब्लैकमेल करने के लिए इस कृत्य का वीडियो भी बनाया। जब पीड़िता ने अपने पति को इस बारे में बताया, तो मामला गांव की पंचायत में पहुंचा, जिसने वीडियो को डिलीट करके और परिवार को समझौता करने के लिए मजबूर करके मामले को रफा-दफा कर दिया।
लेकिन, 10 दिसंबर, 2024 को मामला और बिगड़ गया, जब कथित तौर पर आरोपी ने पीड़िता के घर में घुसकर उसकी ग्यारह वर्षीय बेटी के साथ मारपीट करने की कोशिश की। इस बार, पीड़िता के पति ने पीछे हटने से इनकार कर दिया और एसएसपी डॉ. विपिन ताडा से संपर्क किया, जिसके परिणामस्वरूप बलात्कार और पोक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
घटनाओं की समयरेखा
जुलाई 2024: आरोपी ने अपराध करने से पहले पीड़िता को सब्जियों में नशीला पदार्थ मिलाकर बेहोश कर दिया।
महीनों तक ब्लैकमेल: अश्लील वीडियो का इस्तेमाल कर उसने पीड़िता को चुप रहने के लिए मजबूर किया।
नवंबर 2024: पीड़िता ने अपने पति को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद वह पंचायत में गई, जहां मामले को दबा दिया गया।
दिसंबर 2024: आरोपी ने पीड़िता की नाबालिग बेटी पर हमला करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस की कार्रवाई
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और पीड़िता की मां और बेटी ने कोर्ट में अपने बयान दर्ज करा दिए हैं। आरोपी को पकड़ने की कोशिश की जा रही है।
न्याय के लिए नाम
यह मामला ग्रामीण न्याय व्यवस्था की कड़वी सच्चाई को उजागर करता है, जिसमें पंचायतें अक्सर आपराधिक रणनीतियों को दरकिनार कर देती हैं, जिससे पीड़ितों को खतरा होता है। सरकार को न्याय दिलाने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की जरूरत है।
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