Wednesday, April 2, 2025
HomeNewsधर्म के नाम पर आरक्षण पर RSS का विरोध: दत्तात्रेय होसबोले ने...

धर्म के नाम पर आरक्षण पर RSS का विरोध: दत्तात्रेय होसबोले ने उठाए औरंगजेब vs दारा शिकोह सहित गंभीर सवाल

धर्म के नाम पर आरक्षण पर RSS का विरोध: दत्तात्रेय होसबोले ने उठाए औरंगजेब vs दारा शिकोह सहित गंभीर सवाल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने कर्नाटक सरकार के उस विवादास्पद फैसले पर कड़ा बयान दिया है, जिसमें उसने सरकारी ठेकों में मुस्लिम अल्पसंख्यकों को 4 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। बेंगलुरू में आयोजित आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के अंतिम सत्र में उन्होंने कहा, “संविधान किसी भी तरह के धर्म आधारित कोटे की इजाजत नहीं देता है। यह फैसला संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर के विचारों के विपरीत है।” उन्होंने आगे चेतावनी दी कि इस तरह के कदम से सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार और असंतुलन बढ़ेगा, जिसका खामियाजा समाज को भुगतना पड़ेगा।

आरक्षण ऐतिहासिक नायकों की पहचान: औरंगजेब या दारा शिकोह?

होसबोले ने देश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े सवालों को भी गहराई से उठाया। उन्होंने कहा, आरक्षण “गंगा-जमुनी तहजीब की बात करने वाले मुगल शहजादे दारा शिकोह को क्यों भूल जाते हैं? दारा शिकोह ने भारतीय दर्शन और सूफी विचारों के बीच सामंजस्य बनाने की कोशिश की थी। लेकिन आज औरंगजेब जैसे शासकों का प्रतीक बनाने की कोशिश हो रही है, जिन्होंने सांस्कृतिक विभाजन को बढ़ावा दिया। उन्होंने दिल्ली के ‘औरंगजेब मार्ग’ का नाम बदलकर ‘एपीजे अब्दुल कलाम मार्ग’ करने को सही कदम बताया और कहा कि ऐसे फैसले राष्ट्रीय एकता को मजबूत करते हैं।

स्वतंत्रता संग्राम की व्यापक परिभाषा

आरएसएस नेता ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की व्याख्या करते हुए कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई से पहले मुगल आक्रमणकारियों के खिलाफ युद्धों को ‘स्वतंत्रता संग्राम’ माना जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, “राणा प्रताप ने जिस तरह विदेशी आक्रमणकारियों का विरोध किया, वह भी देशभक्ति का एक उदाहरण है। हमें उन नायकों को याद करना चाहिए जिन्होंने भारतीय पहचान की रक्षा की।”

बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर चिंता

यह अस्वीकार्य है कि बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का इस्तेमाल किया है.. यह मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन है।” आरएसएस ने इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव पारित किया और केंद्र सरकार से बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाने की मांग की।

राजनीतिक संतुलन और सामाजिक न्याय

होसबाले ने राजनीतिक परिसीमन पर चल रही बहस में भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटें कम करने से क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा। साथ ही, वक्फ संपत्ति संशोधन विधेयक को समाज के हित में बताया। राम मंदिर निर्माण के बारे में उन्होंने कहा, “यह संघ की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सांस्कृतिक जीत है।” आरक्षण पर विवाद: क्या है आरएसएस का तर्क? कर्नाटक सरकार के आरक्षण संबंधी फैसले पर आरएसएस की आपत्ति स्पष्ट है। होसबोले के अनुसार, “सरकारी ठेकों में धर्म के आधार पर कोटा देना पक्षपातपूर्ण है। इससे समाज में असमानता पैदा होगी।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मुस्लिम ठेकेदार भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए गए हैं, जिससे सरकारी संस्थाओं को नुकसान पहुंचा है। निष्कर्ष: आरएसएस के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि संगठन धर्म आधारित राजनीति और इतिहास के ‘चुनिंदा पाठ’ के खिलाफ मुखर है और सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों पर जोर दे रहा है। होसबोले ने दारा शिकोह जैसे उदार चरित्रों को पुनर्जीवित करने की जरूरत बताकर राष्ट्रीय बहस को नई दिशा देने की कोशिश की है।

होसबाले ने राजनीतिक परिसीमन पर चल रही बहस में भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटें कम करने से क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा। साथ ही, वक्फ संपत्ति संशोधन विधेयक को समाज के हित में बताया। राम मंदिर निर्माण के बारे में उन्होंने कहा, “यह संघ की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सांस्कृतिक जीत है।” आरक्षण पर विवाद: क्या है आरएसएस का तर्क? कर्नाटक सरकार के आरक्षण संबंधी फैसले पर आरएसएस की आपत्ति स्पष्ट है। होसबोले के अनुसार, “सरकारी ठेकों में धर्म के आधार पर कोटा देना पक्षपातपूर्ण है। इससे समाज में असमानता पैदा होगी।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मुस्लिम ठेकेदार भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए गए हैं, जिससे सरकारी संस्थाओं को नुकसान पहुंचा है। निष्कर्ष: आरएसएस के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि संगठन धर्म आधारित राजनीति और इतिहास के ‘चुनिंदा पाठ’ के खिलाफ मुखर है और सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों पर जोर दे रहा है। होसबोले ने दारा शिकोह जैसे उदार चरित्रों को पुनर्जीवित करने की जरूरत बताकर राष्ट्रीय बहस को नई दिशा देने की कोशिश की है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments